श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र की यात्रा के दौरान पाँच विशिष्ट चैत्यवंदन किए जाते हैं, जिनका आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। ये पाँच चैत्यवंदन निम्नलिखित हैं:
यह चैत्यवंदन मूलनायक भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव)
"इच्छाकारेण संदिसह भगवन् चैत्यवंदन करूँ इच्छं।"
पुंडरीक स्वामी भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर थे, जिन्होंने इसी पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था。 स्थान: palitana 5 chaityavandan in hindi full
नीचे Palitana के 5 चैत्यावंदन (पांच चैत्यों को नमन/वंदन) पर हिंदी में पूरा पाठ दिया गया है — यह श्रद्धा एवं भक्ति से पाँच प्रमुख मंदिर/चैत्यों का वर्णन-समर्पण करने वाला संक्षिप्त, पाठ्यात्मक वंदन-रचना है। (यदि आप चाहते हैं, तो इसे मंत्र/भजन की शैली में पारंपरिक रूप से गाया जा सकता है।)
अब यात्री आगे बढ़ता है। रास्ते में उसे दिखती है। कहानी है कि राजा कुमारपाल सोलंकी ने 12वीं शताब्दी में पालीताना मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। वे स्वयं इसी गुफा में तपस्या करते थे।
द्वितीय चैत्य — ज्ञान का वंदन दूसरे चैत्य को नमन, ज्ञान दीप से उजियारा अटल। विचारों के अंधकार हरता, मोक्ष-सूत्र जहाँ हुआ वाजल॥ ॐ नमो ज्ञानदायिने नाभीराया कुल मंडनो
मुख्य जिनालय (Main Temple), गर्भगृह। हिंदी पाठ:
मुख्य मंदिर के सामने स्थित पुंडरीक स्वामी की देरी। हिंदी पाठ:
श्री पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन (Pundarik Swami) प्रभुजी परम दयाल
आदिदेव अलवेशरु, विनीतानी राय;नाभीराया कुल मंडनो, मरुदेवा माय।पांचसे धनुषनी देहडी, प्रभुजी परम दयाल;चौराशी लाख पूर्वनी, जस आयु विशाल।वृषभ लांछन जिन वृषधरू, वंदू वार हजार;'कीर्ति' कहे भवजल तरण, ए साचो करतार।
रायण वृक्ष के नीचे स्थित का वंदन अत्यंत फलदायी माना जाता है。 चैत्यवंदन मूल पाठ:
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव धरीने जे चढे, तेने भव पार उतारे. अनंत सिद्धनो ऐह ठाम, सकल तीर्थनो राय; पूर्व नवनु ऋषभदेव, ज्यांईं ठविया प्रभुपाय."
हिंदी अनुवाद के साथ पढ़ना चाहेंगे?
श्री आदिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Lord Adinath - Main Temple)